RRB हिन्दी के लिए PYQ पैटर्न अभ्यास
RRB Clerk/PO और IBPS SO शैली के आधार पर कठिन PYQ पैटर्न अभ्यास।
पाठ का उद्देश्य
यह पाठ सामान्य छोटे प्रश्नों की जगह IBPS SO/Scale-II स्तर के कठिन, संदर्भ-आधारित और विकल्प-भ्रम वाले प्रश्नों का अभ्यास कराता है। प्रश्नों का स्तर इस तरह रखा गया है कि विद्यार्थी केवल नियम याद करके नहीं, बल्कि संदर्भ, भाषा-संगति, गद्यांश-तर्क और विकल्प-हटाने की क्षमता से उत्तर दे।
स्रोत-प्रेरणा
इन प्रश्नों के गद्यांश और विषय-वस्तु वित्तीय समावेशन, ग्रामीण ऋण, डिजिटल भुगतान, PACS, सहकारिता, कृषि उद्यम और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर उपलब्ध हिन्दी संपादकीय/विश्लेषण पृष्ठों से प्रेरित हैं। वास्तविक प्रश्न और गद्यांश AgriDots द्वारा मौलिक रूप से लिखे गए हैं।
| स्रोत | उपयोग |
|---|---|
| Drishti IAS हिन्दी: ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन | अंतिम छोर तक बैंकिंग सेवा, DBT, डिजिटल वित्त की भाषा |
| दैनिक जागरण संपादकीय: PACS और ग्रामीण अर्थव्यवस्था | सहकारिता, भंडारण, किसान आय |
| बिजनेस स्टैंडर्ड हिन्दी: ग्रामीण ऋण और बैंकिंग साख | औपचारिक ऋण, ऋण उपयोगिता, अनौपचारिक निर्भरता |
| ग्रामीण डिजिटल भुगतान/UPI विश्लेषण | नकदी, भरोसा, शिकायत निवारण, स्थानीय सहायता |
PYQ पैटर्न मिश्रित अभ्यास
- कुल प्रश्न: 15
- सुझाया समय: 15 मिनट
- स्तर: IBPS SO / RRB SO Scale-II
- नकारात्मक अंकन अभ्यास: संदेह वाले प्रश्न छोड़ें
अभ्यास कैसे करें
- पहले गद्यांश-आधारित प्रश्न हल करें, फिर व्याकरण और शब्द-चयन करें।
- हर प्रश्न में दो विकल्प हटाने की कोशिश करें।
- उत्तर देखने से पहले अपना कारण लिखें।
- गलती को केवल "गलत" न लिखें; गलती का प्रकार लिखें: गद्यांश, अर्थ, व्याकरण, शब्द-संगति, समय या लापरवाही।
परीक्षा-स्तर संकेत
| प्रश्न परिवार | कठिनाई क्यों बढ़ती है |
|---|---|
| गद्यांश | उत्तर सीधे पंक्ति से नहीं, मुख्य तर्क से निकलता है |
| क्लोज | विकल्प अर्थ और व्याकरण दोनों से मिलते-जुलते होते हैं |
| त्रुटि पहचान | गलती सूक्ष्म लिंग, कारक या शब्द-चयन में होती है |
| शब्द-युग्म | परिणाम/परिमाण, अपेक्षा/उपेक्षा जैसे निकट शब्द भ्रम पैदा करते हैं |
| वाक्य क्रम | संयोजक, सर्वनाम और विचार-प्रवाह से क्रम बनता है |
संपादकीय-शैली गद्यांश 1
वित्तीय समावेशन पर चर्चा अक्सर बैंक खाते खोलने तक सीमित रह जाती है, जबकि वास्तविक समावेशन तब माना जाएगा जब ग्रामीण परिवार खाते का नियमित, सुरक्षित और उत्पादक उपयोग कर सके। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ने खातों को सक्रिय करने में मदद की है, परन्तु कई क्षेत्रों में बैंक शाखा की दूरी, डिजिटल साक्षरता की कमी और आय की मौसमी प्रकृति अभी भी बाधा बनी हुई है। कृषि परिवारों के लिए समस्या केवल ऋण उपलब्धता की नहीं, बल्कि ऋण के समय, उद्देश्य और पुनर्भुगतान क्षमता की भी है। यदि फसल-चक्र से मेल न खाने वाली किश्तें तय हों, तो औपचारिक ऋण भी दबाव का कारण बन सकता है। इसलिए बैंकिंग व्यवस्था को केवल वितरण लक्ष्य नहीं, बल्कि ऋण उपयोगिता, सलाह, बीमा और बाजार-संपर्क को साथ लेकर चलना होगा।
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पाठ का उद्देश्य
यह पाठ सामान्य छोटे प्रश्नों की जगह IBPS SO/Scale-II स्तर के कठिन, संदर्भ-आधारित और विकल्प-भ्रम वाले प्रश्नों का अभ्यास कराता है। प्रश्नों का स्तर इस तरह रखा गया है कि विद्यार्थी केवल नियम याद करके नहीं, बल्कि संदर्भ, भाषा-संगति, गद्यांश-तर्क और विकल्प-हटाने की क्षमता से उत्तर दे।
स्रोत-प्रेरणा
इन प्रश्नों के गद्यांश और विषय-वस्तु वित्तीय समावेशन, ग्रामीण ऋण, डिजिटल भुगतान, PACS, सहकारिता, कृषि उद्यम और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर उपलब्ध हिन्दी संपादकीय/विश्लेषण पृष्ठों से प्रेरित हैं। वास्तविक प्रश्न और गद्यांश AgriDots द्वारा मौलिक रूप से लिखे गए हैं।
| स्रोत | उपयोग |
|---|---|
| Drishti IAS हिन्दी: ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन | अंतिम छोर तक बैंकिंग सेवा, DBT, डिजिटल वित्त की भाषा |
| दैनिक जागरण संपादकीय: PACS और ग्रामीण अर्थव्यवस्था | सहकारिता, भंडारण, किसान आय |
| बिजनेस स्टैंडर्ड हिन्दी: ग्रामीण ऋण और बैंकिंग साख | औपचारिक ऋण, ऋण उपयोगिता, अनौपचारिक निर्भरता |
| ग्रामीण डिजिटल भुगतान/UPI विश्लेषण | नकदी, भरोसा, शिकायत निवारण, स्थानीय सहायता |
PYQ पैटर्न मिश्रित अभ्यास
- कुल प्रश्न: 15
- सुझाया समय: 15 मिनट
- स्तर: IBPS SO / RRB SO Scale-II
- नकारात्मक अंकन अभ्यास: संदेह वाले प्रश्न छोड़ें
अभ्यास कैसे करें
- पहले गद्यांश-आधारित प्रश्न हल करें, फिर व्याकरण और शब्द-चयन करें।
- हर प्रश्न में दो विकल्प हटाने की कोशिश करें।
- उत्तर देखने से पहले अपना कारण लिखें।
- गलती को केवल "गलत" न लिखें; गलती का प्रकार लिखें: गद्यांश, अर्थ, व्याकरण, शब्द-संगति, समय या लापरवाही।
परीक्षा-स्तर संकेत
| प्रश्न परिवार | कठिनाई क्यों बढ़ती है |
|---|---|
| गद्यांश | उत्तर सीधे पंक्ति से नहीं, मुख्य तर्क से निकलता है |
| क्लोज | विकल्प अर्थ और व्याकरण दोनों से मिलते-जुलते होते हैं |
| त्रुटि पहचान | गलती सूक्ष्म लिंग, कारक या शब्द-चयन में होती है |
| शब्द-युग्म | परिणाम/परिमाण, अपेक्षा/उपेक्षा जैसे निकट शब्द भ्रम पैदा करते हैं |
| वाक्य क्रम | संयोजक, सर्वनाम और विचार-प्रवाह से क्रम बनता है |
संपादकीय-शैली गद्यांश 1
वित्तीय समावेशन पर चर्चा अक्सर बैंक खाते खोलने तक सीमित रह जाती है, जबकि वास्तविक समावेशन तब माना जाएगा जब ग्रामीण परिवार खाते का नियमित, सुरक्षित और उत्पादक उपयोग कर सके। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ने खातों को सक्रिय करने में मदद की है, परन्तु कई क्षेत्रों में बैंक शाखा की दूरी, डिजिटल साक्षरता की कमी और आय की मौसमी प्रकृति अभी भी बाधा बनी हुई है। कृषि परिवारों के लिए समस्या केवल ऋण उपलब्धता की नहीं, बल्कि ऋण के समय, उद्देश्य और पुनर्भुगतान क्षमता की भी है। यदि फसल-चक्र से मेल न खाने वाली किश्तें तय हों, तो औपचारिक ऋण भी दबाव का कारण बन सकता है। इसलिए बैंकिंग व्यवस्था को केवल वितरण लक्ष्य नहीं, बल्कि ऋण उपयोगिता, सलाह, बीमा और बाजार-संपर्क को साथ लेकर चलना होगा।
संपादकीय-शैली गद्यांश 2
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटल भुगतान का प्रसार तेज हुआ है, पर उसका असर समान रूप से नहीं दिखता। जिन क्षेत्रों में इंटरनेट, व्यापारी स्वीकृति और भरोसेमंद शिकायत निवारण उपलब्ध है, वहाँ छोटे लेन-देन भी डिजिटल हो रहे हैं। दूसरी ओर, नकदी पर निर्भर मंडियों और छोटे व्यापारियों में डिजिटल भुगतान तब तक स्थायी व्यवहार नहीं बनता जब तक भुगतान की पुष्टि, निकासी और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया सरल न हो। डिजिटल माध्यम पारदर्शिता बढ़ा सकता है, पर तकनीकी विफलता या धोखाधड़ी का डर नए उपयोगकर्ताओं को पीछे भी कर सकता है। इसलिए डिजिटल वित्त का अगला चरण केवल ऐप-आधारित नहीं, बल्कि स्थानीय सहायता, भाषा-सुलभ सूचना और भरोसेमंद बैंकिंग प्रतिनिधियों पर आधारित होना चाहिए।
संपादकीय-शैली गद्यांश 3
सहकारी संस्थाएँ और प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ ग्रामीण वित्त का पुराना लेकिन महत्त्वपूर्ण आधार रही हैं। यदि इन्हें केवल ऋण वितरण केंद्र माना जाए, तो उनकी क्षमता सीमित रह जाती है। भंडारण, प्रसंस्करण, सामूहिक खरीद, विपणन और डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़कर ये संस्थाएँ किसान की सौदेबाजी शक्ति बढ़ा सकती हैं। परन्तु इसके लिए शासन-व्यवस्था, लेखांकन पारदर्शिता और पेशेवर प्रबंधन आवश्यक है। कमजोर संस्था में नया ढाँचा भी पुराने दोषों को बढ़ा सकता है। अतः सहकारिता सुधार का अर्थ केवल पूँजी या भवन नहीं, बल्कि जवाबदेही, सदस्य-भागीदारी और सेवा-गुणवत्ता का सुधार है।
अभ्यास सेट
नीचे दिए गए प्रश्न इसी पाठ के संरचित अभ्यास-डेटा में भी जोड़े गए हैं, ताकि यह पेज पाठ के रूप में खुले और अभ्यास संकेत भी उपलब्ध रहें।
प्रश्न 1
निर्देश: वित्तीय समावेशन पर चर्चा अक्सर बैंक खाते खोलने तक सीमित रह जाती है, जबकि वास्तविक समावेशन तब माना जाएगा जब ग्रामीण परिवार खाते का नियमित, सुरक्षित और उत्पादक उपयोग कर सके। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ने खातों को सक्रिय करने में मदद की है, परन्तु कई क्षेत्रों में बैंक शाखा की दूरी, डिजिटल साक्षरता की कमी और आय की मौसमी प्रकृति अभी भी बाधा बनी हुई है। कृषि परिवारों के लिए समस्या केवल ऋण उपलब्धता की नहीं, बल्कि ऋण के समय, उद्देश्य और पुनर्भुगतान क्षमता की भी है। यदि फसल-चक्र से मेल न खाने वाली किश्तें तय हों, तो औपचारिक ऋण भी दबाव का कारण बन सकता है। इसलिए बैंकिंग व्यवस्था को केवल वितरण लक्ष्य नहीं, बल्कि ऋण उपयोगिता, सलाह, बीमा और बाजार-संपर्क को साथ लेकर चलना होगा।
गद्यांश का मुख्य तर्क क्या है?
(a) खाता खोलना ही वित्तीय समावेशन है
(b) वित्तीय समावेशन खाते के सक्रिय और उत्पादक उपयोग से पूरा होता है
(c) ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवा की जरूरत नहीं है
(d) फसल-चक्र का बैंकिंग से कोई संबंध नहीं है
उत्तर: वित्तीय समावेशन खाते के सक्रिय और उत्पादक उपयोग से पूरा होता है
तर्क: गद्यांश खाता खोलने से आगे उपयोग, ऋण समय, सलाह और पुनर्भुगतान पर जोर देता है।
प्रश्न 2
निर्देश: वित्तीय समावेशन पर चर्चा अक्सर बैंक खाते खोलने तक सीमित रह जाती है, जबकि वास्तविक समावेशन तब माना जाएगा जब ग्रामीण परिवार खाते का नियमित, सुरक्षित और उत्पादक उपयोग कर सके। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ने खातों को सक्रिय करने में मदद की है, परन्तु कई क्षेत्रों में बैंक शाखा की दूरी, डिजिटल साक्षरता की कमी और आय की मौसमी प्रकृति अभी भी बाधा बनी हुई है। कृषि परिवारों के लिए समस्या केवल ऋण उपलब्धता की नहीं, बल्कि ऋण के समय, उद्देश्य और पुनर्भुगतान क्षमता की भी है। यदि फसल-चक्र से मेल न खाने वाली किश्तें तय हों, तो औपचारिक ऋण भी दबाव का कारण बन सकता है। इसलिए बैंकिंग व्यवस्था को केवल वितरण लक्ष्य नहीं, बल्कि ऋण उपयोगिता, सलाह, बीमा और बाजार-संपर्क को साथ लेकर चलना होगा।
लेखक के अनुसार औपचारिक ऋण भी दबाव कब बन सकता है?
(a) जब ऋण नकद दिया जाए
(b) जब किश्तें फसल-चक्र से मेल न खाएँ
(c) जब बैंक सलाह दे
(d) जब किसान बीमा ले
उत्तर: जब किश्तें फसल-चक्र से मेल न खाएँ
तर्क: गद्यांश में यही कारण स्पष्ट रूप से दिया गया है।
प्रश्न 3
सही क्रम चुनें: (A) इसलिए ऋण की समय-सारिणी महत्त्वपूर्ण है। (B) किसान की आय अक्सर मौसमी होती है। (C) असंगत किश्तें भुगतान दबाव बढ़ा सकती हैं। (D) बैंक को फसल-चक्र समझना चाहिए।
(a) B-C-A-D
(b) A-B-C-D
(c) D-A-C-B
(d) C-B-D-A
उत्तर: B-C-A-D
तर्क: पहले मौसमी आय, फिर समस्या, फिर निष्कर्ष, फिर बैंक के लिए निर्देश।
प्रश्न 4
समूह में असंगत वाक्य चुनें: (A) ग्रामीण ऋण में पुनर्भुगतान क्षमता देखनी चाहिए। (B) फसल बीमा जोखिम कम कर सकता है। (C) शहरों में मेट्रो रेल का विस्तार तेज हुआ है। (D) बैंक सलाह से ऋण उपयोगिता बढ़ सकती है।
(a) A
(b) B
(c) C
(d) D
उत्तर: C
तर्क: C ग्रामीण वित्त/कृषि ऋण श्रृंखला से बाहर है।
प्रश्न 5
निर्देश: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटल भुगतान का प्रसार तेज हुआ है, पर उसका असर समान रूप से नहीं दिखता। जिन क्षेत्रों में इंटरनेट, व्यापारी स्वीकृति और भरोसेमंद शिकायत निवारण उपलब्ध है, वहाँ छोटे लेन-देन भी डिजिटल हो रहे हैं। दूसरी ओर, नकदी पर निर्भर मंडियों और छोटे व्यापारियों में डिजिटल भुगतान तब तक स्थायी व्यवहार नहीं बनता जब तक भुगतान की पुष्टि, निकासी और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया सरल न हो। डिजिटल माध्यम पारदर्शिता बढ़ा सकता है, पर तकनीकी विफलता या धोखाधड़ी का डर नए उपयोगकर्ताओं को पीछे भी कर सकता है। इसलिए डिजिटल वित्त का अगला चरण केवल ऐप-आधारित नहीं, बल्कि स्थानीय सहायता, भाषा-सुलभ सूचना और भरोसेमंद बैंकिंग प्रतिनिधियों पर आधारित होना चाहिए।
गद्यांश के अनुसार डिजिटल भुगतान का अगला चरण किस पर आधारित होना चाहिए?
(a) केवल नए ऐप पर
(b) स्थानीय सहायता, भाषा-सुलभ सूचना और भरोसेमंद प्रतिनिधियों पर
(c) केवल नकदी निकासी पर
(d) केवल बड़े व्यापारियों पर
उत्तर: स्थानीय सहायता, भाषा-सुलभ सूचना और भरोसेमंद प्रतिनिधियों पर
तर्क: अंतिम वाक्य में लेखक यही समाधान देता है।
प्रश्न 6
निर्देश: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटल भुगतान का प्रसार तेज हुआ है, पर उसका असर समान रूप से नहीं दिखता। जिन क्षेत्रों में इंटरनेट, व्यापारी स्वीकृति और भरोसेमंद शिकायत निवारण उपलब्ध है, वहाँ छोटे लेन-देन भी डिजिटल हो रहे हैं। दूसरी ओर, नकदी पर निर्भर मंडियों और छोटे व्यापारियों में डिजिटल भुगतान तब तक स्थायी व्यवहार नहीं बनता जब तक भुगतान की पुष्टि, निकासी और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया सरल न हो। डिजिटल माध्यम पारदर्शिता बढ़ा सकता है, पर तकनीकी विफलता या धोखाधड़ी का डर नए उपयोगकर्ताओं को पीछे भी कर सकता है। इसलिए डिजिटल वित्त का अगला चरण केवल ऐप-आधारित नहीं, बल्कि स्थानीय सहायता, भाषा-सुलभ सूचना और भरोसेमंद बैंकिंग प्रतिनिधियों पर आधारित होना चाहिए।
डिजिटल भुगतान स्थायी व्यवहार क्यों नहीं बन पाता?
(a) क्योंकि ग्रामीण लोग कोई रिकॉर्ड नहीं रखते
(b) क्योंकि भुगतान पुष्टि, निकासी और शिकायत प्रक्रिया कठिन हो सकती है
(c) क्योंकि सभी मंडियाँ पूर्णतः डिजिटल हैं
(d) क्योंकि बैंकिंग प्रतिनिधि अनावश्यक हैं
उत्तर: क्योंकि भुगतान पुष्टि, निकासी और शिकायत प्रक्रिया कठिन हो सकती है
तर्क: गद्यांश व्यवहारगत बाधाओं को तकनीक और भरोसे से जोड़ता है।
प्रश्न 7
निर्देश: सहकारी संस्थाएँ और प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ ग्रामीण वित्त का पुराना लेकिन महत्त्वपूर्ण आधार रही हैं। यदि इन्हें केवल ऋण वितरण केंद्र माना जाए, तो उनकी क्षमता सीमित रह जाती है। भंडारण, प्रसंस्करण, सामूहिक खरीद, विपणन और डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़कर ये संस्थाएँ किसान की सौदेबाजी शक्ति बढ़ा सकती हैं। परन्तु इसके लिए शासन-व्यवस्था, लेखांकन पारदर्शिता और पेशेवर प्रबंधन आवश्यक है। कमजोर संस्था में नया ढाँचा भी पुराने दोषों को बढ़ा सकता है। अतः सहकारिता सुधार का अर्थ केवल पूँजी या भवन नहीं, बल्कि जवाबदेही, सदस्य-भागीदारी और सेवा-गुणवत्ता का सुधार है।
लेखक PACS की क्षमता को किससे जोड़ता है?
(a) केवल ऋण वितरण से
(b) भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद, विपणन और डिजिटल रिकॉर्ड से
(c) केवल भवन निर्माण से
(d) केवल सरकारी अनुदान से
उत्तर: भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद, विपणन और डिजिटल रिकॉर्ड से
तर्क: गद्यांश सहकारी संस्था को बहु-सेवा मंच के रूप में देखता है।
प्रश्न 8
निर्देश: सहकारी संस्थाएँ और प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ ग्रामीण वित्त का पुराना लेकिन महत्त्वपूर्ण आधार रही हैं। यदि इन्हें केवल ऋण वितरण केंद्र माना जाए, तो उनकी क्षमता सीमित रह जाती है। भंडारण, प्रसंस्करण, सामूहिक खरीद, विपणन और डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़कर ये संस्थाएँ किसान की सौदेबाजी शक्ति बढ़ा सकती हैं। परन्तु इसके लिए शासन-व्यवस्था, लेखांकन पारदर्शिता और पेशेवर प्रबंधन आवश्यक है। कमजोर संस्था में नया ढाँचा भी पुराने दोषों को बढ़ा सकता है। अतः सहकारिता सुधार का अर्थ केवल पूँजी या भवन नहीं, बल्कि जवाबदेही, सदस्य-भागीदारी और सेवा-गुणवत्ता का सुधार है।
"नया ढाँचा भी पुराने दोषों को बढ़ा सकता है" का आशय क्या है?
(a) ढाँचा हमेशा हानिकारक है
(b) संस्थागत पारदर्शिता और प्रबंधन के बिना निवेश पर्याप्त नहीं है
(c) सहकारी संस्थाएँ अप्रासंगिक हैं
(d) डिजिटल रिकॉर्ड जरूरी नहीं है
उत्तर: संस्थागत पारदर्शिता और प्रबंधन के बिना निवेश पर्याप्त नहीं है
तर्क: यह शासन-जोखिम की बात है।
प्रश्न 9
त्रुटि पहचानें: "डिजिटल भुगतान से पारदर्शिता तो बढ़ती है, लेकिन धोखाधड़ी का आशंका भी बना रहता है।"
(a) डिजिटल भुगतान से
(b) पारदर्शिता तो बढ़ती है
(c) धोखाधड़ी का आशंका
(d) भी बना रहता है
उत्तर: धोखाधड़ी का आशंका
तर्क: "आशंका" स्त्रीलिंग है, इसलिए "धोखाधड़ी की आशंका" होगा।
प्रश्न 10
रिक्त स्थान भरें: "नीति का _______ तभी दिखेगा जब उसका क्रियान्वयन समय पर हो।"
(a) परिणाम
(b) परिमाण
(c) प्रणाम
(d) प्रमाण
उत्तर: परिणाम
तर्क: नीति का असर/नतीजा परिणाम है, परिमाण मात्रा है।
प्रश्न 11
किस शब्द में उपसर्ग नहीं है?
(a) अनियमित
(b) प्रतिक्रिया
(c) सरलता
(d) निष्क्रिय
उत्तर: सरलता
तर्क: सरलता में प्रत्यय "ता" है, उपसर्ग नहीं।
प्रश्न 12
सही वाक्य चुनें।
(a) बैंक शाखाएँ किसान को सलाह देता है।
(b) बैंक शाखाएँ किसानों को सलाह देती हैं।
(c) बैंक शाखा किसानों को सलाह देते हैं।
(d) बैंक शाखाओं किसानों को सलाह देती है।
उत्तर: बैंक शाखाएँ किसानों को सलाह देती हैं।
तर्क: कर्ता "शाखाएँ" के अनुसार स्त्रीलिंग बहुवचन क्रिया चाहिए।
प्रश्न 13
"किसान की आय मौसमी होने के कारण ऋण की किस्तें _______ ढंग से तय की जानी चाहिए।"
(a) चक्रीय
(b) मनमाने
(c) असंलग्न
(d) अप्रमाणित
उत्तर: चक्रीय
तर्क: फसल और आय के चक्र से मेल बैठाने का भाव है।
प्रश्न 14
"आँख मूँदकर निर्णय लेना" का परीक्षा-संदर्भ में अर्थ क्या होगा?
(a) सावधानी से निर्णय लेना
(b) तथ्यों की जाँच किए बिना निर्णय लेना
(c) निर्णय स्थगित करना
(d) सार्वजनिक निर्णय लेना
उत्तर: तथ्यों की जाँच किए बिना निर्णय लेना
तर्क: मुहावरे का अर्थ अंधानुकरण/बिना जाँच निर्णय है।
प्रश्न 15
"विद्या + आलय" का सही रूप चुनें।
(a) विद्यालय
(b) विद्याल्य
(c) विद्याआलय
(d) विदालय
उत्तर: विद्यालय
तर्क: आ + आ के संयोग से "आ" रूप बनता है और मानक शब्द विद्यालय है।
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